रामस्य हिमवद्गमनम्
Rama’s Journey to Himavat
मरुत्संघट्टनाघृष्टनीरसांघ्रिपजन्मना / सानिलेनानलेनोच्छैर्दह्यमानं नवं क्वचित्
marutsaṃghaṭṭanāghṛṣṭanīrasāṃghripajanmanā / sānilenānalenocchairdahyamānaṃ navaṃ kvacit
कहीं वायु के झोंकों से रगड़ खाकर सूखे बाँसों से उत्पन्न दावाग्नि, हवा के साथ भड़कती हुई, नये वन को ऊँचे-ऊँचे जला रही थी।