रामस्य हिमवद्गमनम्
Rama’s Journey to Himavat
इति श्रीब्रह्माण्डे महापुराणे वायुप्रोक्ते मध्यभागे तृतीय उपोद्धातपादे एकविंशति तमौध्यायः // २१// वसिष्ठ उवाच इत्येवमुक्तो भृगुणा तथेत्युक्त्वा प्रणम्य च / रामस्तेनाभ्यनुज्ञातश्चकार गमने मनः
iti śrībrahmāṇḍe mahāpurāṇe vāyuprokte madhyabhāge tṛtīya upoddhātapāde ekaviṃśati tamaudhyāyaḥ // 21// vasiṣṭha uvāca ityevamukto bhṛguṇā tathetyuktvā praṇamya ca / rāmastenābhyanujñātaścakāra gamane manaḥ
इस प्रकार श्रीब्रह्माण्ड महापुराण के वायु-प्रोक्त मध्यभाग के तृतीय उपोद्धातपाद का इक्कीसवाँ अध्याय समाप्त हुआ। वसिष्ठ बोले—भृगु के ऐसा कहने पर राम ने ‘तथास्तु’ कहकर प्रणाम किया; और उनकी अनुमति पाकर प्रस्थान करने का निश्चय किया।