व्यास उवाच तथेत्य् उक्त्वा तु देवेन्द्रम् आजगाम भुवं हरिः प्रयुक्तैः सिद्धगन्धर्वैः स्तूयमानस् त्व् अथर्षिभिः //
अष्टम श्लोक—मूल संस्कृत पाठ उपलब्ध नहीं है; इसलिए यथार्थ अनुवाद संभव नहीं। कृपया श्लोक का पाठ दें।