तं पाञ्चजन्यम् आपूर्य गत्वा यमपुरीं हरिः बलदेवश् च बलवाञ् जित्वा वैवस्वतं यमम् //
यह तीसवाँ श्लोक है—कृपया मूल श्लोक दें; तब श्रद्धापूर्वक यथावत अनुवाद किया जाएगा।