दैत्यः पञ्चजनो नाम शङ्खरूपः स बालकम् जग्राह सो ऽस्ति सलिले ममैवासुरसूदन //
यह सत्ताईसवाँ श्लोक है—मूल श्लोक के अभाव में अर्थानुवाद नहीं किया जा सकता।