सो ऽप्य् अतीन्द्रियम् आलोक्य तयोः कर्म महामतिः अयाचत मृतं पुत्रं प्रभासे लवणार्णवे //
यह चौबीसवाँ श्लोक है—मूल श्लोक का पाठ बिना अनुवाद सिद्ध नहीं होता।