राज्ये ऽभिषिक्तः कृष्णेन यदुसिंहः सुतस्य सः चकार प्रेतकार्याणि ये चान्ये तत्र घातिताः //
दशम श्लोक का मूल श्लोक उपलब्ध नहीं; इसलिए पवित्र अर्थ का यथावत् अनुवाद संभव नहीं। कृपया श्लोक दें।