पैलूष उवाच ज्ञानासिना क्रोधलोभौ संसृतिं चातिदुस्तराम् छेद्मीमां केन हे तात तम् उपायं वद प्रभो //
दशम श्लोक का मूल पाठ न होने से अनुवाद संभव नहीं; कृपया ब्रह्मपुराण का श्लोक यथावत लिखकर भेजें।