अभिमानातिमानानां तथैव सुकृतान्य् अपि एकवासाश् चतुर्वासाः शायी नित्यम् अधस् तथा //
इस अध्याय का आठवाँ श्लोक—यह पवित्र पुराण-वचन श्रद्धा से सुनने योग्य है और धर्म के लिए मन में धारण करने योग्य है।