जलोदरे ऽतिसारे च गण्डमालाविचर्चिके श्वित्रकुष्ठे ऽग्निदग्धे च सिध्मापस्मारयोर् अपि //
यहाँ षष्ठ भाग लोकहित का प्रतिपादन करके सदाचार का मार्ग दिखाता है।