निरिन्द्रियो हि मन्येत व्रणवान् अस्मि निर्व्रणः अलिङ्गो लिङ्गम् आत्मानम् अकालं कालम् आत्मनः //
उनचासवाँ श्लोक (49) — मूल पाठ यहाँ नहीं दिया गया है; इसलिए केवल श्लोक-संख्या सूचित की जाती है।