Role-Allocation in Virāṭa’s Court: Nakula, Sahadeva, and Draupadī’s Concealment
केन सम द्रौपदी कृष्णा कर्मणा विचरिष्यति । न हि किज्चिद् विजानाति कर्म कर्तु यथा स्त्रिय:,युधिष्ठिर बोले--यह ट्रुपदकुमारी कृष्णा हमलोगोंकी प्यारी भार्या है। इसका गौरव हमारे लिये प्राणोंसे भी बढ़कर है। यह माता (पृथ्वी)-की भाँति पालन करनेयोग्य तथा बड़ी बहन (धेनु)-के समान आदरणीय है। यह तो दूसरी स्त्रियोंकी भाँति कोई काम-काज भी नहीं जानती; फिर वहाँ किस कर्मका आश्रय लेकर निवास करेगी?
kena sā draupadī kṛṣṇā karmaṇā vicarīṣyati | na hi kiñcid vijānāti karma kartuṃ yathā striyaḥ ||
યુધિષ્ઠિર બોલ્યા—દ્રૌપદી કૃષ્ણા ત્યાં કયા કર્મથી જીવન નિર્વાહ કરશે? સામાન્ય સ્ત્રીઓની જેમ કોઈ કામ કરવું તેને આવડતું નથી; તો ત્યાં કયા કર્મનો આશ્રય લેશે?
युधिछिर उवाच