Adhyāya 5 (Śānti-parva): Nārada’s account of Karṇa—Jarāsandha encounter and the causal grounds of Karṇa’s fall
इस प्रकार श्रीमह्याभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत राजधर्मानुशासनपर्वमें दुर्योधनके द्वारा स्वयंवरमें रुजकन्याका अपहरण नामक चौथा अध्याय पूरा हुआ,दोनोंके ही बाण क्षीण हो गये, धनुष कट गये और तलवारोंके टुकड़े-टुकड़े हो गये। तब वे दोनों बलशाली वीर पृथ्वीपर खड़े हो भुजाओंद्वारा मल्लयुद्ध करने लगे ।। बाहुकण्टकयुद्धेन तस्य कर्णोडथ युध्यत: । बिभेद संधिं देहस्य जरया श्लेषितस्य हि कर्णने बाहुकण्टक युद्धके द्वारा जरा नामक राक्षसीके जोड़े हुए युद्धपरायण जरासंधके शरीरकी संधिको चीरना आरम्भ किया-
bāhukaṇṭakayuddhena tasya karṇo 'tha yudhyataḥ | bibheda sandhiṃ dehasya jarayā śleṣitasya hi ||
ત્યારે કર્ણે બાહુકણ્ટક-યુદ્ધ—અર્થાત્ નજીકથી પકડી દેહદબાણ વડે થતું મલ્લયુદ્ધ—દ્વારા, રાક્ષસી જરાએ જોડીને રાખેલા યુદ્ધરત જરાસંધના શરીરના સાંધાઓ ચીરવા શરૂ કર્યા.
नारद उवाच