Atithi-prāpti and the Brāhmaṇa’s Deliberation on Triadic Dharma (अतिथिप्राप्तिः धर्मत्रयविचारश्च)
महापुरुषसंज्ञां स लभते स्वेन कर्मणा । तस्मात् प्रसूतमव्यक्तं प्रधानं तं॑ विदुर्बुधा:,“कल्पके आदिदमें जैसा वृत्तान्त घटित हुआ था और जिसे मैंने ज्ञानदृष्टिसे देखा था, वह सब बता रहा हूँ। सांख्य और योगके विद्वान जिन्हें परमात्मा कहते हैं, वे ही अपने कर्मके प्रभावसे महापुरुष नाम धारण करते हैं। उन्हींसे अव्यक्तकी उत्पत्ति हुई है, जिसे विद्वान् पुरुष प्रधानके नामसे भी जानते हैं
mahāpuruṣasaṃjñāṃ sa labhate svena karmaṇā | tasmāt prasūtam avyaktam pradhānaṃ taṃ vidur budhāḥ ||
પોતાના કર્મબળથી તે ‘મહાપુરુષ’ નામની સંજ્ઞા પામે છે. તેની પાસેથી અવ્યક્ત ઉત્પન્ન થાય છે; વિદ્વાનો એ અવ્યક્તને જ ‘પ્રધાન’ નામે પણ ઓળખે છે.
वैशम्पायन उवाच