कालनिर्णयः, युगधर्मवर्णनम्, सृष्टिक्रमश्च
Time-Reckoning, Yuga-Dharma, and the Sequence of Creation
परंतु यदि इस तरह काल मुझपर आक्रमण करके मेरे सिरपर सवार न होता तो मैं आज वज्ज लिये होनेपर भी तुम्हें केवल मुक्केसे मारकर धरतीपर गिरा देता ।। न तु विक्रमकालो<5यं शान्तिकालोडयमागतः । काल: स्थापयते सर्व काल: पचति वै तथा,किंतु यह मेरे लिये पराक्रम प्रकट करनेका समय नहीं है; अपितु शान्त रहनेका समय आया है। काल ही सबको विभिन्न अवस्थाओंमें स्थापित करके सबका पालन करता है और काल ही सबको पकाता (क्षीण करता) है
na tu vikramakālo ’yaṃ śāntikālo ’yam āgataḥ | kālaḥ sthāpayate sarvaṃ kālaḥ pacati vai tathā ||
આ પરાક્રમ બતાવવાનો સમય નથી; શાંતિ અને સંયમનો સમય આવ્યો છે. કાળ જ સૌને તેમની-તેમની સ્થિતિમાં સ્થાપે છે, અને કાળ જ સૌને ‘પકાવે’ છે—ક્ષય અને અંત તરફ લઈ જાય છે.
श॒क्र उवाच