Adhyāya 199: Karma–Jñāna Causality and the Nirguṇa Brahman
Manu’s Instruction
भजन आर (2) अजमनन- ३-श्रुति भी कहती है--'अशरीरं वावसन्तं न प्रियाप्रिये स््पृशत: ।/ २-आठ पुरियोंका बोधक वचन इस प्रकार उपलब्ध होता है-- भूतेन्द्रियमनोबुद्धिवासनाकर्मवायवः । अविद्या चेत्यमुं वर्गमाहु: पुर्यष्टक॑ बुधा: ।। 3३-इन लक्षणोंका नाम-निर्देश श्रुतिमें इस प्रकार किया गया है--“न दृष्टेद्रष्टारं पश्येर्न श्रुतेः श्रोतारं शृणुयान्न मतेर्मन्तारमन्वीथा न विज्ञातेर्विज्ञातारं विजानीया: । नवनवर्त्याधिकशततमो< ध्याय: जापकको सावित्रीका वरदान, उसके पास धर्म, यम और काल आदिका आगमन, राजा इक्ष्वाकु और जापक ब्राह्मणका संवाद, सत्यकी महिमा तथा जापककी परम गतिका वर्णन युधिछिर उवाच कालमृत्युयमानां ते इक्ष्वाकोर्ब्राह्मणस्य च । विवादो व्याह्नतः पूर्व तद् भवान् वक्तुमहति,युधिष्ठिरने पूछा--पितामह! आपने काल, मृत्यु, यम, इक्ष्वाकु और ब्राह्मणके विवादकी पहले चर्चा की थी; अतः उसे बतानेकी कृपा करें इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत मोक्षधर्मपर्वमें जापकका उपाख्यानविषयक एक सौ निन््यानबेवाँ अध्याय पूरा हुआ ॥/ १९९ ॥। पम्प बछ। अकाल द्विशततमो< ध्याय: जापक ब्राह्मण और राजा इक्ष्वाकुकी उत्तम गतिका वर्णन तथा जापकको मिलनेवाले फलकी उत्कृष्टता युधिछिर उवाच किमुत्तरं तदा तौ सम चक्रतुस्तस्य भाषिते । ब्राह्मणो वाथवा राजा तनमे ब्रूहि पितामह
yudhiṣṭhira uvāca | kim uttaraṁ tadā tau sama cakratus tasya bhāṣite | brāhmaṇo vāthavā rājā tan me brūhi pitāmaha ||
યુધિષ્ઠિરે કહ્યું— પિતામહ! તેના વચનો પૂર્ણ થયા પછી, તે બંનેએ—બ્રાહ્મણે કે રાજાએ—ત્યારે સાથે મળીને શું ઉત્તર આપ્યો? કૃપા કરીને મને કહો.
युधिछिर उवाच
The verse frames ethical inquiry as careful listening to wise discourse and seeking the consequential response: Yudhiṣṭhira asks Bhīṣma to report how both a Brāhmaṇa and a king respond after hearing a teaching, highlighting that dharma and liberation are clarified through dialogue and tested by the reactions of different social roles.
Within the Mokṣadharma section, Yudhiṣṭhira continues questioning Bhīṣma about the Jāpaka–Ikṣvāku episode: after a speech has been delivered, he wants to know what the two principal interlocutors (the Brāhmaṇa and the king) said in reply, so the lesson’s outcome and resolution can be understood.