Bhīmasena–Drauṇi Mahāyuddha
Chariot Duel and Astra-Exchange
तत: श्वेतपताकेन बलाकावर्णवाजिना । हेमपृष्ठेन धनुषा नागकक्ष्येण केतुना,तदनन्तर सूतपुत्र कर्ण निर्मल सूर्यके समान तेजस्वी और सब ओरसे पताकाओंद्वारा सुशोभित रथके द्वारा रणयात्राके लिये उद्यत दिखायी दिया। उस रथमें श्वेत पताका फहरा रही थी। बगुलोंके समान सफेद रंगके घोड़े जुते हुए थे। उसपर एक ऐसा धनुष रखा हुआ था, जिसके पृष्ठभागपर सोना मढ़ा गया था। उस रथकी पताकापर हाथीके रस्सेका चिह्न बना हुआ था। उसमें गदाके साथ ही सैकड़ों तरकस रखे गये थे। रथकी रक्षाके लिये ऊपरसे आवरण लगाया गया था। उसमें शतघ्नी, किंकिणी, शक्ति, शूल और तोमर संचित करके रखे गये थे तथा वह रथ अनेक धनुषोंसे सम्पन्न था
tataḥ śvetapatākena balākāvarṇavājinā | hemapṛṣṭhena dhanuṣā nāgakakṣyeṇa ketunā ||
સંજય બોલ્યો—પછી શ્વેત ધ્વજથી શોભિત, બગલાં સમાન સફેદ ઘોડાઓથી જોડાયેલ, પીઠભાગે સોનાથી મઢાયેલ ધનુષ ધરાવતો અને ધ્વજ પર હાથીની કક્ષ્યા-દોરીનું ચિહ્ન ધરાવતો રથ લઈને કર્ણ યુદ્ધયાત્રા માટે તૈયાર થઈ પ્રગટ થયો.
संजय उवाच