भीष्मशिबिरगमनम् — Duryodhana’s Visit to Bhīṣma’s Camp and the Command Appeal
छाद्यमानस्तु नागै: स ध्यात्वा राक्षसपुड़व: । सौपर्ण रूपमास्थाय भक्षयामास पन्नगान्,तदनन्तर उसने बहुत-से नागोंद्वारा राक्षषको आच्छादित कर दिया। नागोंद्वारा आच्छादित होनेपर उस राक्षसराजने कुछ सोच-विचारकर गरुड़का रूप धारण कर लिया और समस्त नागोंको भक्षण करना आरम्भ किया
નાગોથી ઢંકાતો તે રાક્ષસશ્રેષ્ઠ ક્ષણભર ધ્યાન કરીને સૌપર્ણ (ગરુડ) રૂપ ધારણ કરી પન્નગોને ભક્ષણ કરવા લાગ્યો।
संजय उवाच