Kurukṣetra-sainyadarśana and Arjuna-viṣāda (धर्मक्षेत्रे समवेता युयुत्सवः — अर्जुनविषाद)
भद्रकालि नमस्तुभ्यं महाकालि नमोस्तु ते । चण्डि चण्डे नमस्तुभ्यं तारिणि वरवर्णिनि,अर्जुन बोले--मन्दराचलपर निवास करनेवाली सिद्धोंकी सेनानेत्री आर्ये! तुम्हें बारंबार नमस्कार है। तुम्हीं कुमारी, काली, कपाली, कपिला, कृष्णपिंगला, भद्रकाली और महाकाली आदि नामोंसे प्रसिद्ध हो; तुम्हें बारंबार प्रणाम है। दुष्टोंपर प्रचण्ड कोप करनेके कारण तुम चण्डी कहलाती हो, भक्तोंको संकटसे तारनेके कारण तारिणी हो, तुम्हारे शरीरका दिव्य वर्ण बहुत ही सुन्दर है; मैं तुम्हें प्रणाम करता हूँ
bhadrakāli namas tubhyaṃ mahākāli namo 'stu te | caṇḍi caṇḍe namas tubhyaṃ tāriṇi varavarṇini ||
અર્જુન બોલ્યો—હે ભદ્રકાળી! તને નમસ્કાર; હે મહાકાળી! તને નમસ્કાર. હે ચંડી, હે પ્રચંડરૂપિણી! તને નમસ્કાર. હે તારિણી, હે ઉત્તમ વર્ણ-પ્રભાથી દીપ્ત! હું તને પ્રણામ કરું છું.
अजुन उवाच