भीष्मपतनविषये धृतराष्ट्रस्य प्रश्नाः | Dhṛtarāṣṭra’s Questions on Bhīṣma’s Fall
नमस्कृत्वा पितुस्ते5हं पाराशर्याय धीमते | यस्य प्रसादाद् दिव्यं तत् प्राप्तं ज्ञानमनुत्तमम्,राजन! जिनके कृपाप्रसादसे मुझे परम उत्तम दिव्य ज्ञान प्राप्त हुआ है, इन्द्रियातीत विषयको भी प्रत्यक्ष देखनेवाली दृष्टि मिली है, दूरसे भी सब कुछ सुननेकी शक्ति, दूसरेके मनकी बातोंको समझ लेनेकी सामर्थ्य, भूत और भविष्यका ज्ञान, शास्त्रके विपरीत चलनेवाले मनुष्योंकी उत्पत्तिका ज्ञान, आकाशमें चलने-फिरनेकी उत्तम शक्ति तथा युद्धके समय अस्त्रोंसे अपने शरीरके अछूते रहनेका अद्भुत चमत्कार आदि बातें जिन महात्माके वरदानसे मेरे लिये सम्भव हुई हैं, उन्हीं आपके पिता पराशरनन्दन बुद्धिमान् व्यासजीको नमस्कार करके भरतवंशियोंके इस अत्यन्त अद्भुत, विचित्र एवं रोमांचकारी युद्धका वर्णन आरम्भ करता हूँ। आप मुझसे यह सब कुछ जिस प्रकार हुआ था, वह विस्तारपूर्वक सुनें
sañjaya uvāca | namaskṛtvā pituḥ te'haṃ pārāśaryāya dhīmate | yasya prasādād divyaṃ tat prāptaṃ jñānam anuttamam ||
રાજન! આપના પિતા પરાશરનંદન ધીમાન વ્યાસને નમસ્કાર કરીને—જેનાં કૃપાપ્રસાદથી મને તે અનુત્તમ દિવ્ય જ્ઞાન પ્રાપ્ત થયું—હું હવે ભરતવંશીઓના આ અત્યંત અદ્ભુત અને રોમાંચક યુદ્ધનું વર્ણન આરંભું છું; આ બધું જેમ બન્યું તેમ વિસ્તારે સાંભળો।
संजय उवाच