युद्धसंग्रहः
Kurukṣetra Campaign in Summary
सरांसि सरितश्चैव वनानि च गिरीस्तथा । अतिक्रम्याससादाथ रम्यां द्वारवतीं पुरीम्,मार्गमें अनेकानेक सरोवरों, सरिताओं, वनों और पर्वतोंको लाँधकर वे परम रमणीय द्वारका नगरीमें जा पहुँचे। महाराज! उस समय वहाँ रैवतक पर्वतपर कोई बड़ा भारी उत्सव मनाया जा रहा था। सात्यकिको साथ लिये कमलनयन भगवान् श्रीकृष्ण भी उस समय उस महोत्सवमें पधारे
sarāṃsi saritaś caiva vanāni ca girīs tathā | atikramyāsasādātha ramyāṃ dvāravatīṃ purīm ||
માર્ગમાં અનેક સરોવરો, નદીઓ, વનો અને પર્વતોને ઓળંગીને તેઓ અંતે અતિ રમણીય દ્વારવતી નગરીમાં પહોંચ્યા।
वैशम्पायन उवाच