Shloka 5

नारद उवाच तत्त्वं जिज्ञासतां पूर्वमृषीणां भावितात्मनाम्‌ | सनत्कुमारो भगवानिदं वचनमत्रवीत्‌,नारदजीने कहा--वत्स! पूर्वकालकी बात है, पवित्र अन्तःकरणवाले ऋषियोंने तत्त्वज्ञान प्राप्त करनेकी इच्छासे प्रश्न किया। उसके उत्तरमें भगवान्‌ सनत्कुमारने यह उपदेश दिया

Nārada dit : « Mon enfant, jadis, les ṛṣi au cœur purifié, désireux de connaître la vérité essentielle, posèrent une question. En réponse, le Bienheureux Sanatkumāra prononça ici cet enseignement. »

नारद उवाच