अध्याय २८१ — दानधर्मः, न्यायागतधनम्, ऋणत्रय-परिशोधनं च
Dāna ethics, lawful wealth, and settling obligations
स्वर्गायाभिमुख: प्रायाललोकानां हितकाम्यया । सा विनि:सरमाणं तु दृष्टवा शक्रं महौजसम्,कुरुनन्दन! उस समय वृत्रविनाशक इन्द्र लोक-हितकी कामनासे स्वर्गकी ओर जा रहे थे। महातेजस्वी इन्द्रको युद्धभूमिसे निकलकर जाते देख ब्रह्महत्या कुछ ही कालमें उनके पास जा पहुँची
Indra se mit en route, tourné vers le ciel, désirant le bien des mondes. Mais lorsque Brahmahatyā vit Śakra, le très puissant, s’éloigner, elle s’élança à sa poursuite et le rejoignit.
भीष्म उवाच