तास्तु सर्वा विशालाक्ष्यो रूपेणाप्रतिमा भुवि | अत्यरिच्यत तासां तु रोहिणी रूपसम्पदा,वे सब-की-सब विशाल नेत्रोंसे सुशोभित होती थीं। इस भूतलपर उनके रूपकी समानता करनेवाली कोई स्त्री नहीं थी। उनमें भी रोहिणी अपने रूप-वैभवकी दृष्टिसे सबकी अपेक्षा बढ़ी-चढ़ी थी
Toutes, aux larges yeux, étaient d’une beauté sans égale sur la terre : nulle femme ne pouvait leur être comparée. Mais parmi elles, Rohiṇī l’emportait encore, par l’éclat de sa grâce.
वैशम्पायन उवाच