Adhyāya 14: Śalya’s Missile-Pressure and the Pāṇḍava Convergence (शल्यस्य शरवर्षम्)
तमन्तकमिव क्रुद्ध॑ परिघं प्रेक्ष्य पाण्डव: । अर्जुनस्त्वरितो जघ्ने पजचभि: सायकोत्तमै:,युद्धविशारद द्रोणपुत्रने वह परिघ अर्जुनपर दे मारा। क्रोधमें भरे हुए यमराजके समान उस परिघको देखकर पाण्डुपुत्र अर्जुनने तुरंत ही पाँच उत्तम बाणोंद्वारा उसे काट गिराया
Voyant ce parigha, furieux tel la Mort elle-même, Arjuna le Pāṇḍava se hâta de le trancher et de l’abattre de cinq flèches d’élite.
संजय उवाच