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Shloka 19

आशीविषशिशुप्रख्यौ यमकालान्तकोपमौ । इन्द्रवृत्राविव क्रुद्धौ सूर्याचन्द्रसमप्रभौ,वे दोनों पुरुषसिंह रथपर विराजमान और रथियोंमें श्रेष्ठ थे। दोनोंने विशाल धनुष धारण किये थे। दोनों ही बाण, शक्ति और ध्वजसे सम्पन्न थे। दोनों कवचधारी थे और कमरमें तलवार बाँधे हुए थे। उन दोनोंके घोड़े श्वेत रंगके थे। वे दोनों ही शंखसे सुशोभित, उत्तम तरकससे सम्पन्न और देखनेमें सुन्दर थे। दोनोंके ही अंगोंमें लाल चन्दनका अनुलेप लगा हुआ था। दोनों ही साँड्ोंक॒े समान मदमत्त थे। दोनोंके धनुष और ध्वज विद्युत॒के समान कान्तिमान्‌ थे। दोनों ही शस्त्रसमूहोंद्वारा युद्ध करनेमें कुशल थे। दोनों ही चँवर और व्यजनोंसे युक्त तथा श्वेत छत्रसे सुशोभित थे। एकके सारथि श्रीकृष्ण थे तो दूसरेके शल्य। उन दोनों महारथियोंके रूप एक-से ही थे। उनके कंधे सिंहके समान, भुजाएँ बड़ी-बड़ी और आँखें लाल थीं। दोनोंने सुवर्णकी मालाएँ पहन रखी थीं। दोनों सिंहके समान उन्नत कंधोंसे प्रकाशित होते थे। दोनोंकी छाती चौड़ी थी और दोनों ही महान्‌ बलशाली थे। दोनों एक-दूसरेका वध चाहते और परस्पर विजय पानेकी अभिलाषा रखते थे। गोशालामें लड़नेवाले दो साँड़ोंके समान वे दोनों एक-दूसरेपर धावा करते थे। मद बहानेवाले मदोन्मत्त हाथियोंके समान दोनों ही रोषावेशमें भरे हुए थे। पर्वतके समान अविचल थे। विषधर सर्पोंके शिशुओं-जैसे जान पड़ते थे। यम, काल और अन्तकके समान भयंकर प्रतीत होते थे। इन्द्र और वृत्रासुरके समान वे एक-दूसरेपर कुपित थे। सूर्य और चन्द्रमाके समान अपनी प्रभा बिखेर रहे थे। क्रोधमें भरे हुए दो महान्‌ ग्रहोंके समान प्रलय मचानेके लिये उठ खड़े हुए थे। दोनों ही देवताओंके बालक, देवताओंके समान बली और देवतुल्य रूपवान्‌ थे। दैवेच्छासे भूतलपर उतरे हुए सूर्य और चन्द्रमाके समान शोभा पाते थे। दोनों ही समरांगणमें बलवान्‌ और अभिमानी थे। युद्धके लिये नाना प्रकारके अस्त्र-शस्त्र धारण किये हुए थे। प्रजानाथ! आमने-सामने खड़े हुए दो सिंहोंके समान उन दोनों नरव्याप्र वीरोंको देखकर आपके सैनिकोंको महान्‌ हर्ष हुआ

āśīviṣa-śiśu-prakhyau yama-kālāntakopamau | indra-vṛtrāv iva kruddhau sūryā-candra-sama-prabhau ||

Sañjaya dit : «Tous deux semblaient des petits de serpents venimeux ; ils paraissaient terribles comme Yama, Kāla et Antaka. Tels Indra et Vṛtra, ils étaient en fureur l’un contre l’autre, et ils brillaient d’un éclat égal, comme le Soleil et la Lune.»

आशीविषvenomous serpent
आशीविष:
Karta
TypeNoun
Rootआशीविष
FormMasculine, Nominative, Dual
शिशु-प्रख्यौresembling young ones (of serpents)
शिशु-प्रख्यौ:
Karta
TypeAdjective
Rootशिशु-प्रख्य
FormMasculine, Nominative, Dual
यमYama (god of death)
यम:
Karta
TypeNoun
Rootयम
FormMasculine, Nominative, Singular
कालTime / Death
काल:
Karta
TypeNoun
Rootकाल
FormMasculine, Nominative, Singular
अन्तकEnder (death)
अन्तक:
Karta
TypeNoun
Rootअन्तक
FormMasculine, Nominative, Singular
उपमौcomparable to / like
उपमौ:
Karta
TypeAdjective
Rootउपम
FormMasculine, Nominative, Dual
इन्द्रIndra
इन्द्र:
Karta
TypeNoun
Rootइन्द्र
FormMasculine, Nominative, Singular
वृत्रौVritra (as a pair: Indra and Vritra)
वृत्रौ:
Karta
TypeNoun
Rootवृत्र
FormMasculine, Nominative, Dual
इवlike, as
इव:
TypeIndeclinable
Rootइव
क्रुद्धौangry
क्रुद्धौ:
Karta
TypeAdjective
Rootक्रुद्ध
FormMasculine, Nominative, Dual
सूर्यSun
सूर्य:
Karta
TypeNoun
Rootसूर्य
FormMasculine, Nominative, Singular
चन्द्रMoon
चन्द्र:
Karta
TypeNoun
Rootचन्द्र
FormMasculine, Nominative, Singular
सम-प्रभौhaving equal radiance / equally radiant
सम-प्रभौ:
Karta
TypeAdjective
Rootसम-प्रभ
FormMasculine, Nominative, Dual

संजय उवाच

S
Sañjaya
Y
Yama
K
Kāla
A
Antaka
I
Indra
V
Vṛtra (Vṛtrāsura)
S
Sūrya (Sun)
C
Candra (Moon)
V
venomous serpents (āśīviṣa)