अभिमन्यु-पराक्रमवर्णनम्
Abhimanyu’s Prowess and the Duḥśāsana Engagement
तांस्तथा ब्रुवतो दृष्टवा सौभद्र: प्रहसन्निव । यो योअस्मै प्राहरत् पूर्व त॑ तं विव्याध पत्रिभि:,उनको ऐसा कहते देख सुभद्राकुमार अभिमन्यु मानो जोर-जोरसे हँसने लगा और जिस-जिस योद्धाने उसपर पहले प्रहार किया, उस-उसको उसने भी अपने पंखयुक्त बाणोंद्वारा घायल कर दिया
Les voyant parler ainsi, Abhimanyu, fils de Subhadrā, sembla rire. Et quiconque le frappait le premier, celui-là même il le perçait de flèches empennées, le blessant.
संजय उवाच