Chapter 43: Tumult of Battle-Sounds and the Proliferation of Dvandva
Paired Engagements
सम्बन्ध-- छठे श्लोकपर दो शंकाएँ होती हैं-पहली यह कि सबके प्रकाशक सूर्य, चन्द्रमा और अग्नि आदि तेजोमय पदार्थ परमात्माको क्यों नहीं प्रकाशित कर सकते और दूसरी यह कि परमधामको प्राप्त होनेके बाद पुरुष वापस क्यों नहीं लौटते। इनमेंसे दूसरी शंकाके उत्तरमें सातवें शलोकमें जीवात्माको परमेश्वरका सनातन अंश बतलाकर ग्यारहवें श*्लोकतक उसके स्वरूप, स्वभाव और व्यवहारका वर्णन करते हुए उसका यथार्थ स्वरूप जाननेवालोंकी महिमा कही गयी। अब पहली शंकाका उत्तर देनेके लिये भगवान् बारहवेंसे पंद्रहवें श*लोकोंतक गुण; प्रभाव और फ्ेश्वर्यसहित अपने स्वरूपका वर्णन करते हैं-- यदादित्यगतं तेजो जगद् भासयते5खिलम् | यच्चन्द्रमसि यच्चाग्नौ तत् तेजो विद्धि मामकम्,सूर्यमें स्थित जो तेज सम्पूर्ण जगत्को प्रकाशित करता है तथा जो तेज चन्द्रमामें है और जो अग्निमें है, उसको तू मेरा ही तेज जानः
yad ādityagataṁ tejo jagad bhāsayate ’khilam | yac candramasi yac cāgnau tat tejo viddhi māmakam ||
La splendeur qui demeure dans le soleil et illumine le monde entier, et la splendeur qui est dans la lune et dans le feu — sache que cette splendeur est la Mienne.
अजुन उवाच