हिरण्यपुरवर्णनम्
Description of Hiraṇyapura and the Nivātakavacas
इस प्रकार श्रीमहाभारत उद्योगपर्वके अन्तर्गत भगवद्यानपर्वमें मातलिके द्वारा वरका खोजविषयक अद्ठानबेवाँ अध्याय पूरा हुआ ॥/ ९८ ॥। एकोनशततमो<थध्याय: नारदजीके द्वारा पाताललोकका प्रदर्शण नारद उवाच एतत् तु नागलोकस्य नाभिस्थाने स्थितं पुरम् पातालमिति विख्यात॑ दैत्यदानवसेवितम्,नारदजी बोले--मातले! यह जो नागलोकके नाभिस्थान (मध्यभाग)-में स्थित नगर दिखायी देता है, इसे पाताल कहते हैं। इस नगरमें दैत्य और दानव निवास करते हैं। यहाँ जो कोई भूतलके जंगम प्राणी जलके साथ बहकर आ जाते हैं, वे इस पातालमें पहुँचनेपर भयसे पीड़ित हो बड़े जोरसे चीत्कार करने लगते हैं
nārada uvāca | etat tu nāgalokasya nābhisthāne sthitaṃ puram | pātālam iti vikhyātaṃ daityadānavasevitam ||
Nārada dijo: «Oh Mātali, esta ciudad que aquí se muestra, situada en la región central —como el ombligo— del mundo de los Nāga, es célebre con el nombre de Pātāla. Es morada y lugar de reunión de Daityas y Dānavas».
नारद उवाच