अव्यक्त-मानस-सृष्टिवादः
Doctrine of Creation from the Unmanifest ‘Mānasa’
अन्त्येषु रेमिरे धीरा न ते मध्येषु रेमिरे अन्त्यप्राप्तिं सुखामाहुर्दु:खमन्तरमन्त्ययो:,ज्ञानी पुरुष अन्तिम स्थितियोंमें रमण करते हैं, मध्यवर्ती स्थितिमें नहीं। अन्तिम स्थितिकी प्राप्ति सुखस्वरूप बतायी जाती है और उन दोनोंके मध्यकी स्थिति दुःखरूप कही गयी है
Los sabios se complacen en los dos extremos, no en el término medio. Dicen que alcanzar el extremo es dicha, y que la condición entre ambos extremos es dolor.
ब्राह्मण उवाच