तस्मै पर्णमयं दिव्यं दिव्यपुष्पाधिवासितम् । गन्धाढ्यं शयनं प्रादात् स शिश्ये तत्र वै सुखम्,तब पक्षीने उसके लिये पत्तोंका दिव्य बिछावन तैयार किया, जो फूलोंसे अधिवासित होनेके कारण सुगन्धसे मँह-मँह महक रहा था। वह बिछावन उसे दिया और गौतम उसपर सुखपूर्वक सोया
Entonces el ave le preparó un lecho divino hecho de hojas, perfumado por flores celestiales, de fragancia abundante. Se lo entregó, y Gautama durmió allí con placidez.
भीष्म उवाच