अध्याय १ — न्यग्रोधवनोपवेशनम् तथा द्रौणिनिश्चयः
Night at the Banyan and Drauṇi’s Resolve
धृतराष्ट्र रवाच अश्रद्धेयमिदं कर्म कृतं भीमेन संजय । यत् स नागायुतप्राण: पुत्रो मम निपातित:,धृतराष्ट्र बोले--संजय! मेरे पुत्र दुर्योधनमें दस हजार हाथियोंका बल था तो भी उसे भीमसेनने मार गिराया। उनके द्वारा जो यह कार्य किया गया है, इसपर सहसा विश्वास नहीं होता
Dijo Dhṛtarāṣṭra: «¡Sañjaya! Es increíble esta acción de Bhīma: que mi hijo, con la fuerza de diez mil elefantes, haya sido derribado.»
संजय उवाच