Śākadvīpa–Pramāṇa–Varṇana
Measurements and Description of Śākadvīpa
दर्शितं द्वीपसंस्थानमुत्तरं ब्रूहि संजय । धृतराष्ट्र बोले--संजय! तुमने द्वीपोंकी स्थितिके विषयमें तो बड़े विस्तारके साथ वर्णन किया है। अब जो अन्तिम विषय--सूर्य, चन्द्रमा तथा राहुका प्रमाण बताना शेष रह गया है, उसका वर्णन करो ।। ३८ ह || संजय उवाच उक्ता द्वीपा महाराज ग्रहं वै शुणु तत्त्वतः,संजय बोले--महाराज! मैंने द्वीपोंका वर्णन तो कर दिया। अब ग्रहोंका यथार्थ वर्णन सुनिये। कौरव-श्रेष्ठत राहुकी जितनी बड़ी लंबाई-चौड़ाई सुननेमें आती है, वह आपको बताता हूँ। महाराज! सुना है कि राहु ग्रह मण्डलाकार है
sañjaya uvāca | uktā dvīpā mahārāja grahān vai śṛṇu tattvataḥ |
Sañjaya dijo: «Oh gran rey, ya he descrito los continentes (dvīpas). Ahora escucha, conforme a la verdad, el relato de los astros (grahas).»
संजय उवाच