Putra-Bheda: Kṣetraja, Kṛtaka, Apasada, and Saṃskāra Determinations (पुत्रभेद-निर्णयः)
ईर्षवो मानकामाश्च चण्डाश्न सुहृदो5बुधा: । स्त्रियस्तु मानमर्हन्ति ता मानयत मानवा:,महाराज मनु जब स्वर्गको जाने लगे तब उन्होंने स्त्रियोंको पुरुषोंके हाथमें सौंप दिया और कहा--'मनुष्यो! स्त्रियाँ अबला, थोड़ेसे वस्त्रोंस काम चलानेवाली, अकारण हितसाधन करनेवाली, सत्यलोकको जीतनेकी इच्छावाली (सत्यपरायणा), ईर्ष्यालु, मान चाहनेवाली, अत्यन्त कोप करनेवाली, पुरुषके प्रति मैत्रीभाव रखनेवाली और भोली-भाली होती हैं। स्त्रियाँ सम्मान पानेके योग्य हैं, अतः तुम सब लोग उनका सम्मान करो; क्योंकि सत्री-जाति ही धर्मकी सिद्धिका मूल कारण है। तुम्हारे रतिभोग, परिचर्या और नमस्कार स्त्रियोंक ही अधीन होंगे
īrṣyavo mānakāmāś ca caṇḍāś ca suhṛdo 'budhāḥ | striyas tu mānam arhanti tā mānayata mānavāḥ ||
Dijo Bhīṣma: «Las mujeres pueden ser celosas, anhelar honra, encenderse pronto en ira, ser afectuosas como amigas y, a menudo, de corazón sencillo. Con todo, las mujeres son dignas de respeto. Por eso, oh hombres, honradlas.»
भीष्म उवाच