कल्मषापहर-कीर्तनम् / Kīrtana for the Removal of Impurity
एवंभूतो नरो देवि स्वर्गतिं प्रतिपद्यते । ततो मानुषतां प्राप्प विशिष्टकुलजो भवेत्,देवि! जो न तो उद्दण्ड है, न अभिमानी है तथा जो देवताओं और द्विजोंकी पूजा करता है, संसारके लोग जिसे पूज्य मानते हैं, जो बड़ोंको प्रणाम करनेवाला, विनयी, मीठे वचन बोलनेवाला, सब वर्णोका प्रिय और सम्पूर्ण प्राणियोंका हित करनेवाला है, जिसका किसीके साथ द्वेष नहीं है, जिसका मुख प्रसन्न और स्वभाव कोमल है, जो सदा स्वागतपूर्वक स्नेहभरी वाणी बोलता है, किसी भी प्राणीकी हिंसा नहीं करता तथा सबका यथायोग्य सत्कारपूर्वक पूजन करता रहता है, जो मार्ग देने योग्य पुरुषोंको मार्ग देता और गुरुका उसके योग्य समादर करता है, अतिथियोंको आमन्त्रित करके उनकी सेवामें लगा रहता तथा स्वयं आये हुए अतिथियोंका भी पूजन करता है, ऐसा मनुष्य स्वर्गलोकमें जाता है। तत्पश्चात् मानव-योनिमें आकर विशिष्ट कुलमें जन्म लेता है
evaṁbhūto naro devi svargatiṁ pratipadyate | tato mānuṣatāṁ prāpya viśiṣṭakulajo bhavet ||
Maheshvara dijo: «Oh Diosa, un hombre de tal conducta alcanza el camino del cielo. Después, al volver a la existencia humana, nace en una familia distinguida».
श्रीमहेश्वर उवाच