Khāṇḍava-dāha: Indra’s Countermeasures and the Nāga Aśvasena’s Escape (आदि पर्व, अध्याय २१८)
प्राप्तो तु क उपाय: स्यात् तं ब्रवीहि जनार्दन । आस्थास्यामि तदा सर्व यदि शक््यं नरेण तत्ू,जनार्दन! बताइये, इसे प्राप्त करनेका क्या उपाय हो सकता है? यदि मनुष्यके द्वारा कर सकने योग्य होगा तो वह सारा प्रयत्न मैं अवश्य करूँगा
Dijo Arjuna: «¡Oh Janārdana!, dime: ¿qué medio podría haber para obtenerla? Si es algo que un hombre puede llevar a cabo, emprenderé sin falta todo esfuerzo.»
अर्जुन उवाच