Tīrtha-Sevana and the Cursed Apsaras
Grāha-Encounter at Saubhadra Tīrtha
(दाक्षिणात्य अधिक पाठके २५६ श्लोक मिलाकर कुल ४९३ “लोक हैं) भस्न्मा तन (_) अडमन+ा - कण्ठ, तालू, मूर्धा, दन्त और ओषछ्ठ--इन पाँच स्थानों अथवा पाँच आभ्यन्तर प्रयत्नोंके भेदसे पाँच प्रकारके अक्षरसमूह कहे गये हैं। अ इ उ ऋ लू ये पाँच ही मूल स्वर हैं, अन्य स्वर इन्हींके दीर्घ आदि भेद अथवा संधिज हैं। अष्टाधिकद्विशततमो< ध्याय: सुन्द-उपसुन्दकी तपस्या, ब्रह्माजीके द्वारा उन्हें वर प्राप्त होना और दैत्योंके यहाँ आनन्दोत्सव नारद उवाच शृणु मे विस्तरेणेममितिहासं पुरातनम् | भ्रातृभि: सहित: पार्थ यथावृत्तं युधिष्ठिर,नारदजीने कहा--कुन्तीनन्दन युधिष्ठिर! यह वृत्तान्त जिस प्रकार संघटित हुआ था, वह प्राचीन इतिहास तुम मुझसे भाइयोंसहित विस्तारपूर्वक सुनो
nārada uvāca | śṛṇu me vistareṇemam itihāsaṃ purātanam | bhrātṛbhiḥ sahitaḥ pārtha yathāvṛttaṃ yudhiṣṭhira ||
Nārada dijo: «Oh Yudhiṣṭhira, hijo de Kuntī—oh Pārtha—escucha, junto con tus hermanos, mientras te relato con detalle esta antigua leyenda, exactamente como sucedió.»
नारद उवाच