बृहृदश्च उवाच एवमुक्त: स देवैस्तैनैषथ: पुनरब्रवीत् | सुरक्षितानि वेश्मानि प्रवेष्टं कथमुत्सहे,बृहदश्व मुनि कहते हैं--राजन! उन देवताओंके ऐसा कहनेपर निषधनरेशने पुनः उनसे पूछा--“विदर्भराजके सभी भवन (पहरेदारोंसे) सुरक्षित हैं। मैं उनमें कैसे प्रवेश कर सकता हूँ?”
Bṛhadaśva said: When the gods had spoken thus, the king of Niṣadha asked them again: “All the palaces of the king of Vidarbha are strictly guarded. How can I possibly enter them?”
बृहृदश्च उवाच