नलदमयन्त्युपाख्यानम्—नलप्रशंसा हंसदूतवृत्तान्तः
Nala–Damayantī Upākhyāna: Praise of Nala and the Swan-Messenger Episode
८) पज्चाशत्तमोडध्याय: वनमें पाण्डवोंका आहार जनमेजय उवाच यदिदं शोचितं राज्ञा धृतराष्ट्रेण वै मुने । प्रत्राज्य पाण्डवान् वीरान् सर्वमेतन्निरर्थकम्,जनमेजय बोले--मुने! वीर पाण्डवोंको वनमें निर्वासित करके राजा धुृतराष्ट्रने जो इतना शोक किया, यह सब व्यर्थ था
Janamejaya said: “O sage, after banishing the heroic Pāṇḍavas to the forest, all this grief of King Dhṛtarāṣṭra was in vain.”
जनमेजय उवाच