यदि तावदनुद्युक्त: शेते कामसुखात्मक: । नेतव्यो वालिमार्गेण सर्वभूतगतिं त्वया,“यदि वह विषयसुखमें ही आसक्त हो सीताकी खोजके लिये कुछ उद्योग न कर रहा हो तो उसे भी तुम वालीके मार्गसे उसी लोकको पहुँचा देना, जहाँ एक-न-एक दिन सभी प्राणियोंको जाना पड़ता है
“If he remains unroused, lying immersed in sensual ease, then send him along Vālī’s path—dispatch him to that realm which, one day, all living beings must reach.”
मार्कण्डेय उवाच