स्त्रीपर्व — अध्याय १५: गान्धारी-युधिष्ठिर-संवादः
Gandhārī’s Confrontation and Consolation of Yudhiṣṭhira
कि नु राज्येन वै कार्य विहीनाया: सुतैर्मम । द्रौपदी बोली--आर्ये! अभिमन्युसहित वे आपके सभी पौत्र कहाँ चले गये? वे दीर्घकालके बाद आयी हुई आज आप तपस्विनी देवीको देखकर आपके निकट क्यों नहीं आ रहे हैं? अपने पुत्रोंसे हीन होकर अब इस राज्यसे हमें क्या कार्य है? || ३७ ई ।। तां समाश्चासयामास पृथा पृुथुललोचना,अभ्यगच्छत गान्धारीमार्तामार्ततरा स्वयम् । नरेश्वर! विशाल नेत्रोंवाली कुन्तीने शोकसे कातर हो रोती हुई द्रपदकुमारीको उठाकर धीरज बँधाया और उसके साथ ही वे स्वयं भी अत्यन्त आर्त होकर शोकाकुल गान्धारीके पास गयीं। उस समय उनके पुत्र पाण्डव भी उनके पीछे-पीछे गये
ki nu rājyena vai kāryaṁ vihīnāyāḥ sutair mama |
Draupadī said: “Noble lady, where have all your grandsons gone, along with Abhimanyu? After so long, why do they not come near you today, seeing you here as an ascetic, venerable queen? Bereft of our sons, what purpose does this kingdom serve for us now?”
वैशम्पायन उवाच