ततो निष्पाण्डवामुर्वी करिष्यन्तं युधां प्रतिम् । द्रोणं ज्ञात्वा धर्मराजं गोविन्दो व्यथितो<ब्रवीत्,उस समय योद्धाओंमें श्रेष्ठ द्रोण इस पृथ्वीको पाण्डवरहित कर डालनेके लिये उद्यत थे। उनका यह विचार जानकर भगवान् श्रीकृष्णने व्यथित हो धर्मराज युधिष्ठिरसे कहा --
Then, knowing that Droṇa—the foremost among warriors—was bent on making this earth bereft of the Pāṇḍavas, Govinda (Śrī Kṛṣṇa), distressed at heart, spoke to Dharmarāja Yudhiṣṭhira—
संजय उवाच