रजनीमुखे सुरौद्रे तु वर्तमाने महाभये । अवहारं ततः कृत्वा सहिता: कुरुपाण्डवा: । न्यविशन्त यथाकाल गत्वा स्वशिबिरं तदा,फिर उस महाभयानक तथा अत्यन्त रौद्र रूपवाले प्रदोषकालमें कौरव तथा पाण्डव एक साथ अपनी सेनाओंको लौटाकर यथासमय शिविरमें जा पहुँचे और विश्राम करने लगे
At the dread and savage hour of dusk, the Kurus and the Pandavas together withdrew their armies; then, in due time, they reached their own camps and took their rest.
संजय उवाच