कृप-अर्जुन रथयुद्धम्
Kṛpa–Arjuna Chariot Engagement
तस्माद् युद्धोचितं कर्म कर्म वा धर्मसंहितम् । क्रियतामाशु राजेन्द्र सम्प्राप्तश्ष धनंजय:,अतः राजेन्द्र! तुम युद्धोचित कर्तव्यका पालन करो अथवा धर्मके अनुसार कार्य करो --बिना युद्धके ही राज्य देकर सन्धि कर लो। जो कुछ करना हो, जल्दी करो। अर्जुन अब सिरपर आ पहुँचे हैं
Darum, o König, vollbringe die Tat, die dem Krieg geziemt, oder handle gemäß dem Dharma. Tu es unverzüglich—Dhanañjaya (Arjuna) ist bereits herangekommen.
भीष्म उवाच