इन्द्रस्य पाण्डवैः समागमः
Indra’s Meeting with the Pāṇḍavas
स्वबाहुबलमाश्रित्य तेनाहं प्रीतिमांस्त्वयि । शापादद्य विनिर्मुक्तो घोरादस्मि वृकोदर,वैशम्पायनजी कहते हैं--जनमेजय! राजा युधिष्ठिर्से ऐसा कहकर कुबेरने भीमसेनसे कहा--“तात! कुरुश्रेष्ठ भीम! तुमने द्रौपदीके लिये जो यह साहसपूर्ण कार्य किया है, इसके लिये मेरे मनमें कोई विचार नहीं है। तुमने मेरी तथा देवताओंकी अवहेलना करके अपने बाहुबलके भरोसे यक्षों तथा राक्षसोंका विनाश किया है, इससे तुमपर मैं बहुत प्रसन्न हूँ। वृकोदर! आज मैं एक भयंकर शापसे छूट गया हूँ
svabāhubalam āśritya tenāhaṁ prītimāṁs tvayi | śāpād adya vinirmukto ghorād asmi vṛkodara ||
Auf die Kraft deiner eigenen Arme gestützt hast du gehandelt; darum ist mein Herz dir zugetan. O Vṛkodara, heute bin ich von einem schrecklichen Fluch befreit.
वैशम्पायन उवाच