Vyavahāra-Śuddhi and Rājadharma: Clean Administration, Counsel, and Proportional Punishment
Chapter 86
चतुरो ब्राह्मणान् वैद्यान् प्रगल्भान् स्नातकान् शुचीन् । क्षत्रियांश्ष॒ तथा चाष्टौ बलिन: शस्त्रपाणिन:,राजाको चाहिये कि जो वेदविद्याके विद्वान, निर्भीक, बाहर-भीतरसे शुद्ध एवं स्नातक हों, ऐसे चार ब्राह्मण, शरीरसे बलवान् तथा शस्त्रधारी आठ क्षत्रिय, धन-धान्यसे सम्पन्न इक्कीस वैश्य, पवित्र आचार-विचारवाले तीन विनयशील शूद्र तथा आठः गुणोंसे युक्त एवं पुराणविद्याको जाननेवाला एक सूत जातिका मनुष्य--इन सब लोगोंका एक मन्त्रिमण्डल बनावे। उस सूतकी अवस्था लगभग पचास वर्षकी हो और वह निर्भीक, दोषदृष्टिसे रहित, श्रुतियों और स्मृतियोंके ज्ञानसे सम्पन्न, विनयशील, समदर्शी, वादी-प्रतिवादीके मामलोंका निपटारा करनेमें समर्थ, लोभरहित और अत्यन्त भयंकर सातः प्रकारके दुर्व्यसनोंसे बहुत दूर रहनेवाला हो। ऐसे आठ मन्त्रियोंके बीचमें राजा गुप्त मन्त्रणा करे
bhīṣma uvāca | caturo brāhmaṇān vaidyān pragalbhān snātakān śucīn | kṣatriyāṃś ca tathā aṣṭau balinaḥ śastrapāṇinaḥ |
Bhishma sprach: „Ein König soll als Ratgeber vier Brahmanen einsetzen—kundig in den Veden und ihren Lehrzweigen, sicher und furchtlos in Rede und Wandel, snātakas, nach außen wie nach innen rein—und dazu acht Kshatriyas, leibeskräftig und waffenführend.“
भीष्म उवाच