छिन्दन्ति क्षमया क्रोध॑ कामं संकल्पवर्जनात् । सत्त्वसंसेवनाज्निद्रामप्रमादाद् भयं तथा,सत्पुरुष क्षमासे क्रोधका, संकल्पके त्यागसे कामका, सत्त्वगुणके सेवनसे निद्राका, प्रमादके त्यागसे भयका तथा अल्पाहारके सेवनद्वारा पाँचवें श्वास-दोषका नाश करते हैं
भीष्म उवाच