साक्षात् स विबुधारिघ्न: क्षत्रे नारायणो विभु: । प्रतिज्ञां पालयंश्वेमां जात: परपुरंजय:,वे सोचने लगे--“अहो! सर्वव्यापक देवशत्रु-विनाशक वैरिनगरविजयी साक्षात् भगवान् नारायणने ही अपनी इस प्रतिज्ञाको पूर्ण करनेके लिये क्षत्रियकुलमें अवतार ग्रहण किया है
Und er dachte: „O Wunder! Nārāyaṇa selbst—der Allgegenwärtige, der Vernichter der Feinde der Götter, der Bezwinger feindlicher Städte—ist im Geschlecht der Kṣatriyas geboren, um dieses Gelübde zu erfüllen.“
वैशम्पायन उवाच