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Shloka 17

Aśvatthāman’s Arrow-Screen and the Confrontation with Yudhiṣṭhira (द्रौणि–युधिष्ठिर-संग्रामः)

तौ हत्वा समरे हन्ता त्वामद्य सहबान्धवम्‌ । पापदेशज दुर्बुद्धे क्षुद्र क्षत्रियपांसन,दुष्ट और पापी देशगमें उत्पन्न हुए नीच क्षत्रिय-कुलांगार दुर्बुद्धि शल्य! तुम उन दोनोंकी किसी स्वार्थसिद्धिके लिये स्तुति करते हो; परंतु आज समरांगणमें उन दोनोंको मारकर बन्धु-बान्धवोंसहित तुम्हारा भी वध कर डालूँगा

कर्ण उवाच