कर्णेन युधिष्ठिरानीकविदारणम् / Karṇa’s Breach of Yudhiṣṭhira’s Battle-Line
स नीललोहितो धूम्र: कृत्तिवासा भयंकर: । आदित्यायुतसंकाशस्तेजोज्वालावृतो ज्वलन्,तत्पश्चात् धूम्रवर्ण, व्याप्रचर्मधारी, देवताओंको अभय तथा दैत्योंको भय देनेवाले, सहस्रों सूर्योके समान तेजस्वी नीललोहित भगवान् शिव तेजोमयी ज्वालासे आवृत हो प्रकाशित होने लगे
Jener Śiva war blaurot und rauchfarben, in Tigerfell gekleidet, furchterregend. Er loderte, von Flammen seines Glanzes umhüllt, strahlend wie tausend Sonnen.
दुर्योधन उवाच